Saturday, March 7, 2020

Tujh Mein Rab Dikhta Hai

Tujh Mein Rab Dikhta Hai
तू ही तो जन्नत मेरी
तू ही मेरा जूनून
तू ही तो मन्नत मेरी
तू ही रूह का सुकून
तू ही अंखियों की ठंडक
तू ही दिल की है दस्तक
और कुछ ना जानूं मैं, बस इतना ही जानूं
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करुँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
कैसी है ये दूरी?
कैसी मजबूरी?
मैंने नज़रों से तुझे छू लिया
हो-हो-हो, कभी तेरी खुशबू
कभी तेरी बातें
बिन मांगे ये जहाँ पा लिया
तू ही दिल की है रौनक
तू ही जन्मों की दौलत
और कुछ ना जानूं, बस इतना ही जानूं
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करुँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
वसदी वसदी वसदी, दिल दी दिल विच वसदी
नसदी नसदी नसदी, दिल रो वे थे नसदी
रब ने बना दी जोड़ी, हाय
वसदी वसदी वसदी,

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